अभय त्रिपाठी / कानपुर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में कानपुर को मजबूत प्रतिनिधित्व मिला है। पार्टी ने कानपुर से तीन वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय परिषद का सदस्य चुना है। इनमें पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी, पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार और पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी शामिल हैं।

यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय परिषद के कुल 120 सदस्यों का निर्वाचन संपन्न हुआ है। इस सूची में कानपुर से तीन नेताओं का चयन होना संगठन के भीतर शहर की राजनीतिक अहमियत को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि भाजपा में राष्ट्रीय परिषद के सदस्य ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करते हैं, जिससे इन सदस्यों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कद्दावर चेहरा हैं सत्यदेव पचौरी
पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी को कानपुर की राजनीति का एक सशक्त और प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। उन्होंने वर्ष 2019 से 2024 तक कानपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले वे उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री (खादी, ग्रामोद्योग एवं एमएसएमई) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सत्यदेव पचौरी ने 1991 में आर्य नगर और 2012 व 2017 में गोविंद नगर विधानसभा सीट से विधायक रहते हुए जनसेवा की। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने स्वयं चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन आज भी वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनकी पहचान सादगी और संगठन में मजबूत पकड़ के लिए है।

ओबीसी वर्ग में मजबूत पकड़ रखने वाली प्रेमलता कटियार
पूर्व मंत्री प्रेमलता कटियार भाजपा की वरिष्ठतम नेताओं में गिनी जाती हैं। वे पिछले करीब चार दशकों से भाजपा से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने पांच बार विधायक रहते हुए जनता का प्रतिनिधित्व किया और तीन बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया। खासकर ओबीसी वर्ग में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है, जो संगठन के लिए बड़ी ताकत है।

अनुभवी संगठन नेता हैं नीरज चतुर्वेदी
पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी भी भाजपा के अनुभवी और समर्पित नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने 1991 से 2002 तक लगातार तीन बार कानपुर की जनरलगंज विधानसभा सीट से विधायक रहते हुए क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्तमान में वे भाजपा उत्तर प्रदेश की कार्यकारी समिति के सदस्य हैं और संगठनात्मक मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रीय परिषद में कानपुर से तीन वरिष्ठ नेताओं के चयन को पार्टी के भीतर शहर की मजबूत राजनीतिक स्थिति और नेतृत्व क्षमता के रूप में देखा जा रहा है। इससे आगामी समय में संगठनात्मक निर्णयों और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में कानपुर की भूमिका और प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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