उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव की प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं, जिससे प्रदेशभर में चुनावी हलचल तेज हो गई है। इस बार कुल 25 सदस्य पदों के लिए चुनाव होना है, जिसके लिए बड़ी संख्या में अधिवक्ता प्रत्याशी मैदान में उतर चुके हैं। नामांकन प्रक्रिया जारी है और हाईकोर्ट से लेकर तहसीलों तक चुनावी माहौल गर्म है। इसी क्रम में कानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चन्द्र त्रिपाठी (पूर्व अध्यक्ष एवं महामंत्री कानपुर बार एसोसिएशन) ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के दौरान अधिवक्ताओं ने उत्साह के साथ जुलूस निकाला और नरेश चन्द्र त्रिपाठी के समर्थन में नारेबाज़ी की, जिससे परिसर का माहौल चुनावी रंग में रंग गया। नामांकन दाखिल करने के बाद नरेश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि यदि उन्हें अधिवक्ता समाज का समर्थन मिलता है, तो वे बार और बेंच के बीच समन्वय स्थापित करने को अपनी प्राथमिकता बनाएंगे। उन्होंने बताया कि हाल के समय में प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच कई बार टकराव की स्थितियाँ उत्पन्न हुई हैं, जिन्हें रोकने और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए अधिवक्ता नीति में बदलाव तथा संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिवक्ताओं पर दर्ज होने वाली FIR के मामलों में भी सुधार की जरूरत पर जोर दिया। त्रिपाठी ने कहा, “जिस तरह नेताओं के मामलों में शिकायत दर्ज करने से पहले विस्तृत जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसी तरह अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायतों में भी एक व्यवस्थित जांच होनी चाहिए।” उन्होंने विश्वास दिलाया कि उनकी प्राथमिकता अधिवक्ताओं के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करना रहेगी।

कौन है नरेश चंद्र त्रिपाठी एडवोकेट
नरेश चंद्र त्रिपाठी एक ऐसा नाम सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर पहचाने जाते हैं। इनका जन्म बेहद ही साधारण परिवार में हुआ। पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और शायद यही वजह है कि जीवन साधनों के अभाव में बीतने के बावजूद और पिता के जज्बे के कारण उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर बार उन्होंने खुद को मजबूती से खड़ा किया। नरेश चन्द्र का जन्म कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में हुआ। 3 वर्ष की आयु में पिता जी की मृत्यु के बाद बहुत कठिनाई से जीवन यापन किया। छोटी उम्र में ही उन्हें जीवनयापन के लिए खेती का सहारा लेना पड़ा। पढ़ने की ललक की वजह से खेती के साथ साथ वह अपनी पढाई भी करते रहें। जीवन में बेहद संघर्ष के बावजूद उन्होंने सिर्फ प्राइमरी शिक्षा अर्जित नहीं कि बल्कि उन्होंने उच्च शिक्षा भी हासिल किया। उन्होंने बीएससी करने के बाद एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की और गरीब असहायों की मदद करने के लिए कानपुर कचहरी में वकालत का काम शुरू किया। एशिया की सबसे बड़ी बार एसोसिएशन कानपुर बार एसोसिएशन जहां कभी कैलाश नाथ काटजू , मोती लाल नेहरू, कैलाश नाथ, देवी प्रसाद राय जैसे बड़े और नामी वकील जुड़े रहे हैं वहां नरेश जी ने सक्रिय तौर पर कार्य करना प्रारंभ किया। इस एसोसिएशन से जुड़ने के बाद भी उन्हें काफ़ी संघर्ष करना पड़ा। उनके नेतृत्व में 2010 और 2022 में अधिवक्ताओं का ऐतिहासिक आंदोलन हुआ जिसमें अधिवक्ताओं की जबतक सभी माँगे मान ली नही गयी, तब तक धारदार चरणबद्ध आंदोलन चला। आखिर में सभी माँगे मानी गयी।

नरेश चन्द्र त्रिपाठी का संकल्प
मेरी प्रतिज्ञा – शपथ ग्रहण के एक माह बाद ही संघर्ष और सुधार की शुरुआत।
नरेश चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि चुनाव जीतते ही शपथ ग्रहण के एक महीने के भीतर नीचे दिए गए सभी संकल्पों पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दूँगा—
- अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करवाने का आंदोलन उत्तर प्रदेश में Advocate Protection Act लागू होने तक सतत, चरणबद्ध और निर्णायक आंदोलन। जब तक कानून लागू नहीं होगा—संग्राम जारी रहेगा।
- सभी अधिवक्ताओं को चैंबर दिलाने की लड़ाई, सर्दी–गर्मी–बरसात में खुले में बैठकर वकालत करने की मजबूरी खत्म होगी। हर अधिवक्ता को व्यवस्थित चैंबर दिलवाने के लिए सरकार से संघर्ष होगा।
- अधिवक्ताओं को आयुष्मान योजना में शामिल करवाना
हर अधिवक्ता और उनके परिवार को आर्थिक व चिकित्सीय सुरक्षा मिले—इसके लिए निर्णायक प्रयास। - नए अधिवक्ताओं के लिए ₹5000 प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि
नए अधिवक्ताओं को 3 वर्षों तक सम्मानजनक सहयोग मिले।
इसके लिए ₹5000 मासिक Advocate Stipend की व्यवस्था कराने की लड़ाई। - वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए ₹5000 मासिक पेंशन
वृद्ध अधिवक्ताओं के सम्मानपूर्ण जीवन व इलाज हेतु Advocate Pension Scheme लागू कराई जाएगी। - न्यायिक अधिकारियों की मनमानी समाप्त — जवाबदेही सुनिश्चित
न्यायिक अधिकारियों द्वारा—मनमानी,अनुचित व्यवहार अधिवक्ताओं के सम्मान के विरुद्ध रवैया को हर हाल में रोका जाएगा।उनके आदेशों–निर्णयों में जवाबदेही सुनिश्चित कराई जाएगी। - अधिवक्ता बीमा योजना प्रभावी रूप से लागू होगी
बीमा योजना को कागज़ों में नहीं—ज़मीन पर लागू कराया जाएगा। - जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं का उत्पीड़न बंद मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा प्रदेश मुख्य न्यायमूर्ति से मिलकर अधिवक्ताओं का उत्पीड़न रोकने की व्यवस्था कराई जाएगी।
- अधिवक्ताओं के महान सम्मान व गौरव की पुनर्स्थापना, अधिवक्ता स्वतंत्र हैं, वेतनभोगी नहीं। उनके सम्मान, गरिमा व प्रतिष्ठा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
- अधिवक्ताओं की आय वृद्धि और पेशागत विकास हेतु संघर्ष वकालत को सम्मानजनक व आय–सुरक्षित पेशा बनाने के लिए ठोस नीतियाँ लागू कराने का संकल्प।
- जिला न्यायालयों की जर्जर व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार
मैं यह भी संकल्प लेता हूँ कि जिला न्यायालयों में— वकीलों के बैठने की कुर्सियाँ की व्यवस्था करना न्यायधीशों के लिए कागज–कलम,अत्यंत छोटे कोर्ट रूम, जर्जर विश्राम कक्ष, खराब कंप्यूटर,
सीसीटीवी का अभाव,खस्ताहाल जज आवास, इन सभी मूलभूत समस्याओं को दूर कराया जाएगा, ताकि न्यायिक प्रक्रिया सुचारू व सम्मानजनक हो। - जजों द्वारा अधिवक्ताओं का अपमान किसी भी हाल में नहीं होने दूँगा उच्च न्यायालय एवं जनपद न्यायालयों में होने वाले—अधिवक्ताओं के अपमान, डांट-फटकार, और गरिमा-भंग के कृत्यों को।
- अधिवक्ताओं को अधिवक्ता कल्याण निधि जो ₹500000 है उसे 10 लाख कराया जाएगा और दो-दो वर्षों तक तीन-तीन वर्षों तक जो चेक नहीं मिलती है उन्हें मृत्यु के बाद अथवा लाइसेंस सरेंडर करने पर ज्यादा से ज्यादा 3 से 6 माह के अंदर चेक दिलवाई जाने की व्यवस्था की जाएगी।
कठोरता से रोका जाएगा।
मेरे संघर्षों का इतिहास – मेरी गारंटी
मेरे कार्यकाल में—
✔ 2009–10 में 50,000 वकीलों का ऐतिहासिक प्रदेश सम्मेलन
✔ 2023 में 50,000 वकीलों का सम्मेलन
✔ अधिवक्ताओं के सभी निर्णयों पर नेतृत्व कर निर्णायक विजय
✔ महामंत्री रहते हुए आज़ादी के बाद पहली बार हाईकोर्ट का घेराव
✔ अध्यक्ष रहते हुए जनपद न्यायाधीश के विरुद्ध अधिवक्ताओं की लड़ाई में अवमानना का मुक़ाबला
मैं झुका नहीं—
मैं डरा नहीं—
मैं पीछे नहीं हटा—
जेल जाने को तैयार था।
और अंततः जनपद न्यायाधीश को हटाना पड़ा।
मेरी प्रतिज्ञा
अधिवक्ता भाइयों की किसी भी मूलभूत समस्या पर
मैं कभी पीछे नहीं हटूँगा।
चाहे गोली खानी पड़े,
चाहे जेल जाना पड़े,
चाहे कितने भी आंदोलन करने पड़ें—
मैं 24 घंटे, 12 महीने, आपकी सेवा में हाज़िर रहूँगा।

Recent Comments