कानपुर।
कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में हुई नाबालिग किशोरी के साथ गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात के बाद आरोपी 50 हजार के इनामी दरोगा अमित कुमार मौर्या की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। घटना को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एसटीएफ समेत करीब 35 से 40 पुलिसकर्मियों की चार टीमें भी आरोपी तक नहीं पहुंच सकी हैं।
आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पीड़िता का परिवार भय और तनाव में जी रहा है। पीड़िता के भाई का कहना है कि आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी के लिए वे कई बार पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब आखिरी सहारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं और जल्द ही जनता दरबार में जाकर शिकायत करेंगे।
पीड़िता के भाई ने बताया कि घर के बाहर हर समय पुलिस का पहरा रहता है। बहन इतनी डरी हुई है कि पुलिस सुरक्षा के बिना कहीं आ-जा नहीं सकती। फोन पर बातचीत के दौरान भी पुलिसकर्मी टोकते हैं। परिवार को लगातार मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला
सचेंडी थाना क्षेत्र की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी 5 जनवरी की रात शौच के लिए घर से बाहर गई थी। इसी दौरान उसका मुंह दबाकर रेलवे पटरी के किनारे ले जाकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया। पीड़िता ने घर लौटकर परिजनों को पूरी आपबीती बताई। परिजन उसे चौकी लेकर पहुंचे, जहां पीड़िता ने आरोपी शिवबरन की पहचान की।
पीड़िता ने दरोगा अमित कुमार मौर्या पर भी गैंगरेप का गंभीर आरोप लगाया, लेकिन आरोप है कि उसे चौकी से भगा दिया गया। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के आदेश पर सचेंडी पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया, हालांकि शुरुआती दौर में पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी गईं।
एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह के मौके पर पहुंचने के बाद जांच में सामने आया कि घटना के समय आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या घटनास्थल पर मौजूद था। उसकी काले रंग की स्कॉर्पियो की लोकेशन भी वहीं मिली। जांच रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपे जाने के बाद आरोपी शिवबरन को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन उसी दौरान दरोगा अमित कुमार मौर्या फरार हो गया।
वीडियो और लेटर वायरल, फिर भी गिरफ्त से दूर
फरार होने के बाद दरोगा अमित कुमार मौर्या ने 8 जनवरी को अपनी सफाई देते हुए एक वीडियो वायरल किया। 9 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस कमिश्नर को संबोधित करते हुए सीबीआई जांच की मांग वाला पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस की सुरागरसी में उसकी आखिरी लोकेशन लखनऊ मिली थी, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल चुका था।
इसके बाद पुलिस ने गोरखपुर के महाराजगंज स्थित उसके पैतृक निवास, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ और अन्य जिलों में रिश्तेदारों, परिचितों और महिला मित्र के घरों पर दबिश दी, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा आरोपी
पुलिस की देरी का फायदा उठाते हुए आरोपी दरोगा हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हाईकोर्ट से पीड़िता को अपना पक्ष रखने का नोटिस जारी किया गया है, हालांकि अब तक पीड़िता बयान देने नहीं पहुंची है।
मामले में एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह का कहना है कि प्रयागराज में आखिरी लोकेशन मिलने के बाद आरोपी की कोई नई लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है। पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है।
फिलहाल सवाल यही है कि क्या कानून की रखवाली करने वाला आरोपी दरोगा कानून से ऊपर है, या फिर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

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