कानपुर के चर्चित उद्योगपति सिंघानिया परिवार में चल रहा संपत्ति और ट्रस्ट विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में फजलगंज थाना पुलिस ने जांच पूरी करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, जबकि एक नामजद आरोपी को साक्ष्य के अभाव में विवेचना से बाहर कर दिया गया है।
यह मामला तब सामने आया जब राधाकुंज, कालपी रोड निवासी प्रनवपत सिंघानिया ने वर्ष 2024 में अपने ही परिवार के सदस्यों पर श्री बलदेव जी महाराज ट्रस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के आदेश पर फजलगंज थाने में उदितपत सिंघानिया, विदुषपत सिंघानिया, शरदपत सिंघानिया, मीनाक्षी सिंघानिया और अद्वैतपत सिंघानिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। प्रनवपत सिंघानिया के अनुसार, उनके दादा स्व. हेमंतपत सिंघानिया, जो अपने पिता राधाकिशन सिंघानिया की मृत्यु के बाद ट्रस्ट के चेयरमैन बने थे, लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए शरदपत सिंघानिया के पुत्र उदितपत और विदुषपत सिंघानिया ने बिना चेयरमैन की जानकारी के वर्ष 2013 में ट्रस्ट के नाम पर बैंक खाते खुलवाए।
दिल्ली के बैंकों में फर्जी दस्तावेजों से खुले खाते
आरोप है कि दिल्ली स्थित स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और केनरा बैंक में ट्रस्ट के नाम पर खाते खोलने के लिए कूटरचित हस्ताक्षर, फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन और प्रस्ताव तैयार किए गए। बैंक पत्राचार के लिए ट्रस्ट के बजाय निजी कार्यालय का पता दर्ज कराया गया, ताकि ट्रस्ट चेयरमैन को किसी भी लेन-देन की जानकारी न हो सके। पुलिस विवेचना में सामने आया कि इन बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग तिथियों में करीब 9 करोड़ 20 लाख 62 हजार 192 रुपये का लेन-देन उदितपत सिंघानिया, विदुषपत सिंघानिया और मीनाक्षी सिंघानिया द्वारा किया गया। 16 सितंबर 2020 को स्व. हेमंतपत सिंघानिया के निधन के बाद जब कई लोग ट्रस्ट से संबंधित धन की वसूली के लिए उनके आवास पर पहुंचने लगे, तब इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
फॉरेंसिक जांच में फर्जी हस्ताक्षरों की पुष्टि
जांच के दौरान पुलिस टीम ने दिल्ली स्थित दोनों बैंकों से खाता खोलने से जुड़े मूल दस्तावेज और स्टेटमेंट जब्त किए। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, सिविल लाइंस (कानपुर) से स्व. हेमंतपत सिंघानिया के मूल हस्ताक्षर लेकर उन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर मूल हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते, जिससे कूटरचना और धोखाधड़ी की पुष्टि हुई।
मामले में यह भी आरोप है कि जब प्रनवपत सिंघानिया को धोखाधड़ी की जानकारी हुई और उन्होंने सलाह के लिए अपने मित्र सुयश अस्थाना को बुलाया, तो उनके सगे भाई अद्वैत सिंघानिया ने जान से मारने की धमकी दी। एफआईआर के अनुसार 10 जून 2024 की शाम सुयश अस्थाना के घर पहुंचते ही अद्वैत सिंघानिया ने उन पर बैट से हमला कर दिया था।
पुलिस ने उदितपत सिंघानिया, विदुषपत सिंघानिया और मीनाक्षी सिंघानिया के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी आईपीसी, जबकि अद्वैतपत सिंघानिया के खिलाफ धारा 323, 352, 504 और 506 आईपीसी के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। वहीं, शरदपत सिंघानिया के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य न मिलने पर पुलिस ने उन्हें विवेचना से बाहर कर दिया है।

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