सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने नए नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ भी हासिल किया है। क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं?
CJI ने केंद्र से कहा- आप SC/ST स्टूडेंट्स के लिए अलग हॉस्टलों की बात कर रहे हैं। ऐसा मत कीजिए। आरक्षित समुदायों में भी ऐसे लोग हैं जो समृद्ध हो गए हैं। कुछ समुदाय दूसरों की तुलना में बेहतर सुविधाओं का आनंद ले रहे हैं।
कोर्ट ने आगे कहा- नियमों की परिभाषा पूरी तरह अस्पष्ट है। इसका दुरुपयोग हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स इसमें संशोधन की सलाह दे सकते हैं। हम यूनिवर्सिटी में एक स्वतंत्र और समान वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
UGC के नए नियम
हर कॉलेज में ईक्वल अपॉर्च्यूनिटी सेंटर (EOC) बनेगा।
EOC पिछड़े और वंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से जुड़ी मदद देगा।
हर कॉलेज में इक्वलिटी कमेटी (समता समिति) बनानी होगी।
इस कमेटी के अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे।
कमेटी में SC/ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे।
कमेटी का कार्यकाल 2 साल होगा।
कॉलेज में एक इक्वलिटी स्क्वाड भी बनेगा, जो भेदभाव पर नजर रखेगा।
भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग जरूरी होगी।
15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देनी होगी।
कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में आगे की कार्रवाई शुरू करनी होगी।
EOC हर 6 महीने में कॉलेज को रिपोर्ट देगा।
कॉलेज को जातीय भेदभाव पर हर साल UGC को रिपोर्ट भेजनी होगी।
UGC राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा।
नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है।
कॉलेज के डिग्री, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लग सकती है।
गंभीर मामलों में UGC की मान्यता भी रद्द हो सकती है।
इधर, देशभर में सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स और आम नागरिकों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध जारी है। गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस के बाहर छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी के न्यू कैंपस में विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े स्टूडेंट्स नारेबाजी करते हुए सड़क पर बैठ गए। छात्रों का हंगामा जारी है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। कानपुर में भरत शुक्ला नाम के एक शख्स ने UGC के विरोध में सिर मुंडवाकर अनोखा प्रदर्शन किया।
UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?
भेदभाव की परिभाषा एकतरफा बताई जा रही नियमों में SC/ST/OBC, महिलाएं और दिव्यांग शामिल हैं।
जनरल कैटेगरी को पीड़ित नहीं माना गया, सिर्फ आरोपी माना जा सकता है।
झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान नहीं फर्जी या गलत शिकायत करने वालों पर कोई जुर्माना या कार्रवाई तय नहीं है।
24 घंटे में कार्रवाई का नियम गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ाता है।
इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं
EOC और इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी का कोई सदस्य जरूरी नहीं।
इससे कमेटी के फैसले एकतरफा होने का डर है।
कॉलेज सजा के डर से सही फैसला नहीं ले पाएंगे नियम तोड़ने पर ग्रांट रोकने और मान्यता रद्द करने का प्रावधान है।
डर के कारण कॉलेज मेरिट के आधार पर निर्णय नहीं ले पाएंगे।
UGC एक्ट 1956 के दायरे से बाहर होने का आरोप विरोध करने वालों का कहना है कि UGC एक्ट अकादमिक मानकों तक सीमित है।
एक्ट में जातीय भेदभाव या उत्पीड़न पर सीधे नियम बनाने की बात नहीं है।

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