ग्रेटर नोएडा : जिला न्यायालय ने चार वर्षीय नाबालिग बच्ची से डिजिटल रेप के मामले में दोष सिद्ध होने पर दीपक कुमार को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो द्वितीय सौरभ• द्विवेदी ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने का भुगतान न करने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक चवनपाल सिंह ने बताया कि घटना नौ अक्टूबर 2019 को फेज-दो कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। किराये पर रहने वाले औरैया जिले के दीपक कुमार ने बच्ची को उसके घर के नीचे खेलते समय कमरे में बुलाकर यौन उत्पीड़न किया था। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर एकत्र लोगों मे दोषी को दबोचकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर डिजिटल रेप की पुष्टि हुई। कोर्ट में कहा कि चार साल की मासूम के साथ यह क्रूरता समाज को शर्मसार करती है। ऐसे अपराधियों के लिए अधिकतम सजा आवश्यक है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा गया कि पाक्सो एक्ट की धारा-42 के तहत आइपीसी की तुलना में अधिक कठोर सजा लागू करना अनिवार्य है। न्यायाधीश ने पीड़िता की उम्र और अपराध की प्रकृति को संवेदनशील और समाज-विरोधी बताया। न्यायाधीश ने दोषी के खिलाफ घृणित अपराध और समाज के विवेक को झटका जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सजा में न्यूनतम छूट देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। साथ ही दोषी ने जेल में काटे पांच साल चार महीने की अवधि को सजा अवधि समायोजित की में किया जाएगा।
क्या है डिजिटल रेप
डिजिटल रेप सुनने में ऐसा लगता है जैसे इंटरनेट के जरिये किया गया है, लेकिन ऐसा नहीं है। अंग्रेजी शब्द डिजिट से बने डिजिटल का मतलब है अंगूठा, उंगली या पैर से किया जाने वाला रेप। जब शरीर के इन हिस्सों का इस्तेमाल प्राइवेट पार्ट्स पर किया जाता है तो वह डिजिटल रेप के अंतर्गत आता है।

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