कानपुर: प्रेम विवाह के तीन महीने बाद पति ने की पत्नी की हत्या, आरोपी फरार।

कानपुर। शहर के पनकी थाना क्षेत्र स्थित राम गंगा एनक्लेव से एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है।...

कानपुर: सिंघानिया परिवार विवाद में बड़ा मोड़, करोड़ों की हेराफेरी के आरोप सही : 4 के खिलाफ चार्जशीट।

कानपुर के चर्चित उद्योगपति सिंघानिया परिवार में चल रहा संपत्ति और ट्रस्ट विवाद अब निर्णायक मोड़ पर...

कानपुर में आक्रोशित वकीलों ने थाना घेरा,जोरदार हंगामाः पूर्व महामंत्री को उठाने पर जमकर नारेबाजी।

कानपुर में बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री को हिरासत में लेने से नाराज वकील हंगामा कर रहे हैं। वह...

#UGC के नए नियमों पर सुप्रीम रोक- केंद्र को नए सिरे से ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश।

सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI...

कानपुर: महाराजपुर के हाथीगांव में नवविवाहिता की संदिग्ध हालात में मौत, 8 महीने पहले हुई थी शादी

Kanpur:कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के हाथीगांव में मंगलवार को एक नवविवाहिता ने संदिग्ध...

UGC 2026 नियमों के खिलाफ PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा।

Kanpur: यूजीसी (UGC) 2026 के नए नियमों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार...

Kanpur : नशे के कारोबार से अरबपति बना विनोद: विदेशों तक फैला कोडीन सिरप नेटवर्क, 6 साल में खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य…

कानपुर।कोडीन युक्त कफ सीरप और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से आरोपी विनोद अग्रवाल महज छह साल में...

कानपुर में 77वें गणतंत्र दिवस पर भव्य आयोजन, पहली बार ITBP जवानों ने परेड में बढ़ाया गौरव।

कानपुर- 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कानपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा पुलिस लाइन ग्राउंड में भव्य और...

कानपुर : 20 दिन बाद भी फरार 50 हजार का इनामी दरोगा, 40 पुलिसकर्मियों की चार टीमें खाली हाथ।

कानपुर।कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में हुई नाबालिग किशोरी के साथ गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात के...
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कानपुर नवाबगंज में चार साल पहले अधिवक्ता व आइआइटी के पूर्व रजिस्टार राजाराम हत्याकांड में शनिवार शाम बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को पुलिस ने एनआरआइ सिटी के बगल में स्थित उनके कार्यालय से उठा लिया। पुलिस टीम उन्हें नवाबगंज थाने लेकर पहुंची तो स्वजन के – साथ सैकड़ों अधिवक्ताओं ने थाने – का घेराव कर नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध में अधिवक्ताओं ने धरना न प्रदर्शन भी शुरू कर दिया। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल, डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव कई थानों की फोर्स के साथ मौके ने पर पहुंचे। पुलिस आयुक्त से बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और भाजपा उत्तर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित की घंटों बातचीत चली। देर रात करीब सवा बारह बजे पुलिस ने राकेश तिवारी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि राजाराम हत्याकांड से उनका कोई लेना देना नहीं है। पुलिस की जांच में सहयोग करूंगा। इसी मामले में पुलिस ने एनआरआइ सिटी के निदेशक एसके पालीवाल और शहर के बड़े सर्राफ राजेश गुप्ता से भी दो घंटे पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ दिया गया।

नवाबगंज के गंगा नगर हाउसिंग सोसाइटी के अधिवक्ता राजाराम वर्मा की एनआरआइ सिटी से लगी 40 बीघा जमीन को बेचने का दबाव बनाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने जमीन नहीं बेची। 22 दिसंबर 2021 को घर के बुलाकर दरवाजे पर ही उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने चौबेपुर बूढ़नपुर निवासी रोहित और चौबेपुर हकीमनगर निवासी दिलनियाज को गिरफ्तार किया था। दोनों को अंकित यादव ने चार लाख में सुपारी दी थी। हिस्ट्रीशीटर रामखिलावन की भी संलिप्तता मिलने पर जेल भेजा गया था। मृतक राजाराम के बेटे नरेंद्र की शिकायत पर दोबारा जांच हो रही है। शनिवार की शाम करीब पांच बजे लखनऊ के नंबर की मर्सडीज कार से सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने राकेश तिवारी को कार्यालय से उठा लिया।

हत्याकांड की उलझी गुत्थी तीन शिकायतों के बाद फिर शुरू हुई पड़ताल।

राजाराम हत्याकांड का जिन्न चार साल बाद फिर सामने आ गया है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस कहानी में ऐसा क्या है, जिसके आधार पर पुलिस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी व अन्य दो से पूछताछ कर रही है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा है कि मामले में पुलिस अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। कोई आरोपित नहीं है।

पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि यह जांच तीन शिकायतों के आधार पर शुरू की गई। पहली शिकायत 18 फरवरी 2025 की है, जिसे राजाराम हत्याकांड में आरोपित रामखिलावन ने आइजीआरएस के माध्यम से की थी। आरोप लगाया था कि उसे गलत फंसा दिया गया, जबकि असली प्रभावशाली आरोपित बाहर हैं। दूसरी शिकायत सुषमा अवस्थी की है। सुषमा के खिलाफ जमीन संबंधी एक मामले में जांच चल रही है। आरोप है कि सुषमा ने एक अन्य महिला के स्थान पर खड़े होकर एक जमीन का बैनामा कराया। सुषमा का आरोप है कि उसके पति मनोज अवस्थी राकेश तिवारी के ड्राइवर थे और उनके कहने पर उसने ऐसा किया। तीसरी शिकायत राजाराम के बेटे नरेंद्र देव की है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पिता की हत्या के प्रभावशाली आरोपितों को बचा लिया गया है या उनके नाम ही प्रकाश में नहीं लाए गए। यह शिकायत एक अप्रैल 2025 को की गई थी। इसके अलावा नरेंद्र के साथ उनकी बहनों ने भी शिकायत की थी।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि इस केस में एनआरआइ सिटी के तीन निदेशक, एक सर्राफ, राजाराम के दिवंगत बेटे शिवा की पत्नी रेखा वर्मा,राकेश तिवारी और राजाराम के सौतेले भाइयों राजबहादुर व रामचंद्र जांच के दायरे में हैं। जांच में सामने आया है कि शूटर दिलनियाज का इंतजाम राजबहादुर व अंकित ने मिलकर की थी। राजाराम को जमीन की खरीद फरोख्त का झांसा देकर शूटर से मिलाया गया था और उसी बहाने वह उनके घर पहुंचा था। पुलिस को जांच में पता चला है कि 50 लाख की सुपारी के एवज में दिलनियाज को केवल 13 हजार रुपये मिले। इसी मुद्दे को लेकर दिलनियाज और अंकित की जेल व अदालत परिसर के बाहर मारपीट भी हुई थी। पुलिस आयुक्त बताया कि आरोप है कि राजाराम हत्याकांड के पहले और बाद में एनआरआइ सिटी के निदेशकों व राकेश तिवारी ने राजाराम की करोड़ों की जमीन हथियाने की कोशिश की थी। सहखातेदारों से जमीन लेने की कोशिश हुई। इसके कुछ साक्ष्य मिले ने भी हैं। राजाराम की हत्या के बाद राकेश तिवारी ने रेखा वर्मा से 7.20 करोड़ में जमीन का सौदा किया। इन बैनामों में राजबहादुर व रामचंद्र गवाहों में हैं। हालांकि राकेश तिवारी ने पूछताछ में स्प्ष्ट किया कि जो जमीन उन्होंने रेखा वर्मा से खरीदी, उसके बैनामे बाद में निरस्त करा दिए गए। वहीं राकेश तिवारी ने यह भी पुलिस को बताया है कि मनोज अवस्थी कभी उनके ड्राइवर नहीं रहे। यह उन्हें फंसाने की साजिश है।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि यह सभी तथ्य राकेश तिवारी व अन्य को आरोपित साबित नहीं कर रहे हैं, लेकिन जांच के लिए पर्याप्त आधार हैं। राकेश तिवारी ने करीब सौ सवालों पूछताछ की गई है। इसी तरह से एसके पालीवाल व राजेश गुप्ता से 60-60 सवाल पूछे गए हैं। सभी के पर से भी जवाबों की जांच पड़ताल होगी, जिसके बाद निर्णय लिया जाएगा।

दोबारा विवेचना में राकेश तिवारी, एसके पालीवाल और राजेश गुप्ता के नाम जांच में सामने आए हैं। तीनों आरोपित नहीं हैं, पूछताछ को बुलाया गया था। न आने पर कार्रवाई करनी पड़ी।

  • रघुबीर लाल, पुलिस आयुक्त

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