कानपुर की सड़कों पर 12 करोड़ की रफ्तार ने 6 जिंदगियों को रौंदा… और अब इस हाई प्रोफाइल हादसे में बड़ा एक्शन हुआ है।
पुलिस की पांच टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। आखिरकार गुरुवार सुबह तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को उसके घर के सामने से गिरफ्तार कर लिया गया।
डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने साफ कहा — जांच में पुष्टि हो चुकी है कि हादसे के वक्त गाड़ी शिवम ही चला रहा था।
पहले ‘अज्ञात’, फिर नाम जुड़ा… और अब गिरफ्तारी
8 फरवरी को वीआईपी रोड पर हुई इस घटना के बाद शुरुआती एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई। मामला तूल पकड़ता गया, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, विपक्ष ने सवाल उठाए — और 24 घंटे के भीतर शिवम मिश्रा का नाम एफआईआर में जोड़ा गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस कमिश्नर ने सार्वजनिक बयान दिया — गाड़ी कारोबारी का बेटा चला रहा था।
यहीं से मामला सिर्फ एक्सीडेंट नहीं, सिस्टम की साख का सवाल बन गया।
‘ड्राइवर मोहन’ की एंट्री… और कोर्ट का झटका
गिरफ्तारी से ठीक पहले केस में फिल्मी मोड़ आया।
मोहन नाम का युवक कोर्ट पहुंचा और बोला — “गाड़ी मैं चला रहा था।”
सरेंडर की कोशिश हुई, लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा और साफ कहा — पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन नहीं।
इतना ही नहीं, गाड़ी के गियर को लेकर पूछे गए सवाल में भी मोहन का जवाब उलझा हुआ दिखा। कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।
‘कुर्बानी’ की ये कोशिश यहीं ठहर गई।
समझौते की चर्चा, पुलिस का इनकार
घायल पक्ष की ओर से समझौते की खबर भी सामने आई। बचाव पक्ष ने इलाज का खर्च देने और समझौता होने का दावा किया।
लेकिन डीसीपी ने स्पष्ट किया — पुलिस के पास कोई आधिकारिक समझौता पत्र नहीं है। जांच तथ्यों के आधार पर चल रही है।
गिरफ्तारी… और कोर्ट में सवाल
गुरुवार सुबह शिवम की गिरफ्तारी हुई। वह अस्वस्थ नजर आया, हाथ में वीगो लगी थी। मेडिकल के बाद उसे एजेसीएम कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट में मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी टिप्पणी की गई।
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा — यदि गिरफ्तारी प्रक्रिया में त्रुटि साबित हुई तो आरोपी को राहत मिल सकती है।
सियासी घमासान भी जारी
कारोबारी केके मिश्रा पहले ही पुलिस कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगा चुके हैं।
वहीं पुलिस का कहना है — कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर हुई है, किसी दबाव में नहीं।
अब आगे क्या?
पांच टीमों की दबिश…
सरेंडर ड्रामा…
समझौते की चर्चा…
और अब गिरफ्तारी पर कानूनी सवाल…
कानपुर का यह लैंबॉर्गिनी कांड अब सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम, रसूख और कानून की परीक्षा बन चुका है।
अब नजर अदालत पर है —
क्या गिरफ्तारी कानूनी कसौटी पर टिकेगी?
या फिर इस हाई प्रोफाइल केस में कोई नया मोड़ आएगा?
अगर चाहें तो इसका “सवालों के घेरे में” हेडलाइन वाला और भी ज्यादा इन्वेस्टिगेटिव डिजिटल वर्ज़न तैयार कर दूं, जो सीधे सिस्टम बनाम रसूख का एंगल

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