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कानपुर : बचपन की तस्वीर से मिस यूपी तक पहुंची अंशिका, नकली ताज से असली क्राउन तक का सफर।

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Kanpur : डफरिन अस्पताल के Dr सुधीर कुमार द्विवेदी हुए सम्मानित।

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कानपुर: सुहागरात टालता रहा पति, पत्नी ने नपुंसकता छिपाकर शादी का लगाया आरोप; 38 लाख खर्च का दावा

कानपुर की एक नवविवाहिता ने पति पर नपुंसकता की बात छिपाकर शादी करने का आरोप लगाते हुए ससुराल पक्ष...

Kanpur : दूल्हा बने बाबा आनंदेश्वर, महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब; लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

कानपुर। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। परमट स्थित श्री आनंदेश्वर...

कानपुर को मिलेगा विश्वस्तरीय क्रिकेट हब: 350 करोड़ से बदलेगा ग्रीन पार्क स्टेडियम का स्वरूप, बढ़ेंगे अंतरराष्ट्रीय व IPL मैच..

कानपुर। शहर के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान ग्रीन पार्क स्टेडियम को अब विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी शुरू...

कानपुर में अखिलेश यादव का BJP पर बड़ा हमला, बोले— ‘स्मार्ट सिटी नहीं, बदनामपुर बन गया शहर’

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कानपुर पहुंचने से पहले जाम में फंसे अखिलेश यादव, वीडियो शेयर कर सरकार पर साधा निशाना

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कानपुर : तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने के आरोपी अरबपति कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के महज 7 घंटे बाद ही जमानत मिल गई। पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड की मांग की थी, लेकिन एजेसीएम कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।
आरोपी के अधिवक्ता नरेश चन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि रिमांड की आवश्यकता क्यों है। जांच अधिकारी इस संबंध में कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद कोर्ट ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी और 20 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत दे दी।
अधिवक्ता के अनुसार, शिवम मिश्रा ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा, किसी को धमकाएगा नहीं और साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेगा।
गुरुवार सुबह 8 बजे पुलिस ने शिवम को उसके घर के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और खुद को छिपाने की कोशिश कर रहा था। यहां तक कहा गया कि सूचना मिली थी कि वह एंबुलेंस के जरिए भागने की फिराक में था।
मेडिकल परीक्षण के बाद पुलिस उसे एजेसीएम कोर्ट में पेश करने पहुंची। पेशी के दौरान शिवम बीमार नजर आया। उसके हाथ में वीगो लगी थी और पुलिसकर्मी व परिजन उसे सहारा देते दिखाई दिए। कोर्ट परिसर में वीडियो बनाए जाने पर वह मीडियाकर्मियों पर नाराज भी हुआ।
हादसे के बाद मामला तूल पकड़ गया था। 8 फरवरी को हुई घटना में 6 लोग घायल हुए थे। प्रारंभ में तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने दावा किया था कि उनका बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था।
मामले के बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने सार्वजनिक रूप से कहा कि जांच में पुष्टि हुई है कि गाड़ी शिवम मिश्रा ही चला रहा था। इस बयान पर कारोबारी ने आपत्ति जताते हुए कमिश्नर के दावे को गलत बताया था।
इसी बीच एक और मोड़ तब आया जब मोहन नामक व्यक्ति कोर्ट पहुंचा और दावा किया कि हादसे के समय लेम्बोर्गिनी वही चला रहा था। हालांकि कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी और उसे मामले में आरोपी नहीं माना।
फिलहाल आरोपी जमानत पर बाहर है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस ने खुद गिरफ्तारी को जरूरी बताया था, तो कोर्ट में रिमांड की जरूरत क्यों साबित नहीं कर सकी। दूसरी ओर, हादसे में घायल लोगों और उनके परिवारों को अब भी न्याय का इंतजार है।

आज का घटनाक्रम

सुबह 8 बजे गिरफ्तारी, दोपहर में कोर्ट में पेशी, जज ने पूछा रिमांड क्यों चाहिए, संतोषजनक जवाब न मिलने पर मिली जमानत
कानपुर
कानपुर के चर्चित लेम्बोर्गिनी कांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तेज रफ्तार लग्जरी कार से 6 लोगों को टक्कर मारने के आरोपी अरबपति कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के महज लगभग 7 घंटे बाद जमानत मिल गई। पुलिस ने कोर्ट से 14 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन एजेसीएम कोर्ट ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी।
आरोपी के अधिवक्ता नरेश चन्द्र त्रिपाठी के अनुसार, कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि रिमांड की आवश्यकता का ठोस आधार क्या है। जांच अधिकारी स्पष्ट और ठोस वजह नहीं बता सके। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी जांच में सहयोग करेगा, किसी को धमकाएगा नहीं और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। इसके बाद कोर्ट ने 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली।
गौरतलब है कि 8 फरवरी को हुई इस घटना में 6 लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद आरोपी के पिता और तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने दावा किया था कि उनका बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। बाद में कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बयान दिया कि जांच में पुष्टि हुई है कि कार शिवम मिश्रा चला रहा था। इस बयान के बाद मामला और गरमा गया।
इसी बीच मोहन नाम का एक व्यक्ति कोर्ट पहुंचा और खुद को चालक बताते हुए सरेंडर की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी और उसे आरोपी नहीं माना।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी को जरूरी बताया था, तो कोर्ट में रिमांड की आवश्यकता क्यों साबित नहीं कर सकी।
मिनट टू मिनट क्या हुआ
सुबह 8:00 बजे
पुलिस टीम शिवम मिश्रा के घर पहुंची और उसे हिरासत में लिया। पुलिस का दावा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और खुद को छिपा रहा था।
सुबह 8:30 बजे
औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की गई। केस डायरी अपडेट की गई और मेडिकल परीक्षण की तैयारी शुरू हुई।
सुबह 9:15 बजे
शिवम को मेडिकल के लिए ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच की। वह अस्वस्थ नजर आया और उसके हाथ में वीगो लगाई गई।
सुबह 10:30 बजे
मेडिकल के बाद पुलिस उसे एजेसीएम कोर्ट लेकर रवाना हुई।
सुबह 11:15 बजे
कोर्ट परिसर में पेश किया गया। मीडिया की मौजूदगी में वह बीमार नजर आया। वीडियो बनाए जाने पर उसने नाराजगी जताई।
दोपहर 12:00 बजे
कोर्ट में पेशी शुरू हुई। पुलिस ने 14 दिन की रिमांड की मांग की और कहा कि जांच आगे बढ़ाने के लिए हिरासत जरूरी है।
दोपहर 12:20 बजे
जज ने जांच अधिकारी से पूछा कि रिमांड की जरूरत का ठोस आधार क्या है और किन बिंदुओं पर पूछताछ बाकी है।
दोपहर 12:30 बजे
जांच अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी सहयोग करेगा।
दोपहर 1:00 बजे
कोर्ट ने रिमांड अर्जी खारिज कर दी और 20 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मंजूर कर ली।
दोपहर करीब 2:00 बजे
जमानत की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिवम मिश्रा को रिहा कर दिया गया।
फिलहाल आरोपी जमानत पर बाहर है। लेकिन हादसे में घायल छह लोगों और उनके परिवारों को अब भी न्याय की प्रतीक्षा है।


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