पीड़ित तो छोड़िए, “पुलिस कमिश्नर” की भी नहीं सुन रही कानपुर पुलिस।

कानपुर : आम आदमी के लिए पुलिस को लेकर हमेशा एक समस्या रहती है कि पुलिस उनकी एफआईआर दर्ज नहीं करती....

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कानपुर में करोड़पति मसाला कारोबारी सूर्यांश खरबंदा की पत्नी आंचल की मौत के मामले में पुलिस की जांच में कई वीडियो-ऑडियो सामने आए हैं। इससे मामले में नया मोड़ आ गया है। इसमें कथित तौर पर आंचल सूर्यांश और उसकी मां को बुरी तरह गालियां दे रही है। गालियां ऐसी हैं कि सभ्य समाज तो दूर, झुग्गी झोपड़ियों में भी न सुनी जाए। एक वीडियो में 15 मिनट में 77 गालियां सुनाई दे रही हैं। ‘Uptvlive.com’ इन वीडियो ऑडियो की पुष्टि नहीं करता।

आंचल के फांसी पर लटकी मिलने के बाद हत्या के आरोप में पति-सास जेल भेज दिए गए हैं। वीडियो-ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस अब नए सिरे से जांच शुरू करेगी। वीडियो में आंचल खुद अपने पति को पीटती व गालियां देती नजर आ रही हैं। पुलिस के मुताबिक आरोपित पक्ष से जो वीडियो व आडियो मिले हैं, उसमें हालात बिल्कुल विपरीत दिखाई पड़ रहे हैं। वहीं पीड़ित पक्ष द्वारा भी जो साक्ष्य दिए गए हैं, उन्हें नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में पूरे केस की नए सिरे से जांच के आदेश दिए गए हैं। दोनों पक्षों के एक-एक पारिवारिक सदस्यों की मोबाइल सीडीआर निकाली जाएगी, उनके बयान लिए जाएंगे।
सूर्यांश खरबंदा एमडीएच सब्जी मसाले के सीएंडएफ (क्लियर एंड फार्वर्डिंग ) एजेंट हैं। सूर्यांश की शादी 9 फरवरी 2019 को रानीगंज काकादेव निवासी पवन ग्रोवर की बेटी आंचल से हुई थी। विवाहिता के पिता पवन के मुताबिक शादी के बाद से ही ससुराल वालों ने दहेज के लिए बेटी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। वह लोग उसे मारते-पीटते थे, लग्जरी गाड़ी की डिमांड की जा रही थी। कई बार बेटी ने इसकी शिकायत की मगर आंचल का घर बचाने के लिए वह सुलह का प्रयास करते रहे। पवन के मुताबिक बेटी ने 12 नवम्बर को फोन पर सूचना दी थी कि सास निशा खरबंदा और पति सूर्यांश उसका सारा जेवर और नकदी लेकर घर से भाग गए हैं। जेवर आंचल ने खुद सूर्यांश को अपने जिम बैग में डालकर ले जाते देखा था।

पेश हैं वीडियो के संपादित अंश…
आंचल: आज मैं न मार खा लेती हूं। (पीटते हुए)
सूर्यांश: क्या बदतमीजी कर रही हो?
आंचल: आज तो मैं मार खा लूंगी, आराम है उसके बाद…
सूर्यांश: क्या कर रही हो यार…
आंचल: और मारो… और मारो। (पीटते हुए) शरीर पर निशान चढ़ा दो।
तुझे बहुत भारी पड़ेगा… गालियां… के चक्कर में तूने हाथ उठाया है न। बहुत भारी पड़ेगा………..तू देख।
सूर्यांश: मैने हाथ उठाया है?
आंचल: हाथ छोड़, हाथ छोड़………….आखिरी बार बोल रही हूं।
सूर्यांश: राधा (नौकरानी आती है)
सूर्यांश: मम्मी को बोलो ऊपर आए। एक मिनट में आएंगी।
आंचल: फिर उस… गालियां को तुम बुला रहे हो…
सूर्यांश: तुम से कंट्रोल नहीं हो पाता…. तुम बेवकूफी कर लो… हाथ काट लिया। करो बेवकूफी… पंखा जिसने चलाया उसको कुछ नहीं कह रही।
आंचल: हाथ छोड़, हाथ छोड़… हाथ छोड़ मैने कहा।
(दोनों चुप बिस्तर पर बैठे हैं। आंचल का हाथ सूर्यांश पकड़ा है)
आंचल: उस… गालियां… को खुश करने के लिए तूने बकवास की..उस… (गालियां) के साथ नहीं रहेगा। (लातों से सूर्यांश को पीटते हुए) उस..(गालियां) को खुश करने के लिए तूने मुझ पर हाथ उठाया। (सूर्यांश का चश्मा जमीन पर गिर गया)
नौकरानी: मालकिन आ रही है।
आंचल: (सूर्यांश को झापड़ मारती है) छोड़ो मुझे। छोड़ो मुझे। और मारो, जैसे यहां मारा है न और मारो। ऐसे और निशान चाहिए। और दो तीन निशान चाहिए मुझे। तुझे अंदर कराने के लिए। अंदर तो तुम लोग जाओगे ही एक पेशेंट पर हाथ उठाया। कसम है तुझे अंदर कराऊंगी।
(निशा खरबंदा कमरे में दाखिल होती है)
सूर्यांश: मम्मी यह कंट्रोल में नही है।
आंचल: बुला… मेरे बाप को। बुला…. बुला मेरे बाप को चल बुला।
निशा: क्या हुआ आंचल अब?
आंचल: धाराप्रवाह गालियां….तेरी वजह से सत्यानाश हुआ है पूरे घर का। एक तेरी जैसी (गालियां) औरत के चक्कर में पूरा घर बर्बाद है। तेरी जैसी औरत को खुद ही जाकर मर जाना चाहिए। ऐसी (गालियां) औरत है तू। ऐसी -(गालियां) औरत है। क्या खिलाया है अपने बेटे को तूने।
इस -(गालियां) को। इस –(गालियां) को क्या खिलाया है तूने। —— खुद विधवा बनकर जी रही है। मेरी शादीशुदा जिंदगी की ..(गालियां) दी तूने।
निशा: तुम क्या चाहती हो?
आंचल: धाराप्रवाह गालियां…..
निशा: बहुत ज्यादा बोल रही हो अब तुम आंचल…
आंचल: धाराप्रवाह गालियां…..
निशा- नहीं नहीं अब बहुत हो गया है।
आंचल: तेरी वजह से सब कुछ हुआ है। मैं तुझे छोड़ूंगी तो नहीं।
निशा: तुम कितना मार रही हो?
आंचल: मैं तुझे खुद बता रही हूं
अगर मैं इस घर में रही तो मैं तुझे खुद जहर देकर मार दूंगी।
निशा- तुम क्या चाहती हो मैं ऊपर न आऊं?
आंचल- तू -धाराप्रवाह गालियां….. मैंने बोला नहीं था कि ऊपर नहीं आओगी। क्यों गालियां-आ रही हो तुम बार बार ऊपर। …..तू नीचे मर रही थी जाकर। सो सोकर मर रही थी तू। नीचे मर जाती हो जाकर। — बुला –बुला तुझे जिसको बुलाना है… गालियां
निशा: मुझे किसी को नहीं बुलाना है।
आंचल: तू बुला न जिसे तुझे बुलाना है। तेरे पास आखिरी आज का मौका है। तुझे जिसे… गालियां… बुलाना है बुला ले। उसके बाद तुम्हारी … गालियां…. वाली है। बहुत — है न तुमने अपनी —— इधर उधर जा जाकर। तुम्हारी — मैं अब लट्ठ पड़वाऊंगी। यह मैं सोचकर बैठी थी बहुत पहले से। बाकी कसर तुम्हारे बेटे ने पूरी कर ही दी है। तुम्हारे चक्कर में इसने मुझे मारा। तुम्हारे जैसी… गालियां… औरत के चक्कर में। मैं तो चाहती हूं अयांश भी ऐसा ही निकले। इसके जैसा। मां का भक्त। ऐसा लड़का चाहिए मुझे तो। जैसा तुम्हारा लड़का है .. गालियां— बीवी पर हाथ उठाएगा। ऐसी औलाद चाहिए मुझे भी..मर जाओ न जाकर कहीं। नीचे तुम्हारा कमरा इसलिए रखा गया कि ऊपर गालियां…. आकर। तुम्हें वह भी बर्दाश्त नहीं हुआ। सुबह से लेकर रात …गालियां… हो तुम अपनी।
निशा: आंचल यह तुमने मारा कि सूर्यांश ने मारा है तुम्हे?
आंचल: सूर्यांश खरबंदा ने मारा है मुझे।
निशा: मैने खुद देखा है बेटा…
आंचल: तूने खुद देखा है न। अपनी आंखे जाकर दान कर दे। चल निकल यहां से। तुझे किसने बुलाया यहां पर इसने बुलाया है न इससे बात कर। मेरे लिए तेरे जैसी…. गाली… औरत। तुम्हारे जैसी — औरत के चक्कर में तुम्हारा पति मर गया। तुम्हारे जैसी — औरत के चक्कर में तुम्हारे बेटे का घर टूट गया। इतनी तुम अभागिन और इतनी — औरत हो तुम। तुम्हे तो शर्म आनी चाहिए अपने आपको आईने में भी देखते हुए। उधर पति गया नहीं। उधर तुमने —शुरू कर दी।
निशा: इधर क्यो बुलाया था मुझे बेटा तुमने..
आंचल: यह सब सुनाने के लिए। (सूर्यांश से ) फोन उठा चल फोन उठा। यहां मै रहूंगी इस… गालियां….का खून कर दूंगी। अब यह मेरी नजर में चढ़ चुकी है। पूरी तरीके से चढ़ चुकी है। इसको मार डालूंगी मैं अपने हाथों से। पता ही नहीं चलेगा मरी कैसे यह।
निशा- मार डालो न फिर
आंचल- मार डालूंगी मैं तुझे।
निशा: क्यो रखा है मुझे
आंचल- गालियां… की तरह मारूंगी तुझे। ऐसे नहीं मारूंगी।
निशा: यह और क्या कर रही हो…
आंचल: तड़पाकर मारूंगी तुझे। … गालियां… तू देख। ऐसे नहीं जाने दूंगी। तू बीमारियों से नहीं मरेगी… निशा खरबंदा। तुझे दूसरी तरह से मारूंगी मैं।
निशा: जैसे मरना था मर गई…
आंचल: मरो न जाकर जाओ मरो। (निशा कमरे से बाहर निकल जाती है) … गालियां—- औरत। बुला लिया उस -गालियां… को। कुछ कर पाई वह —- मेरा।
सूर्यांश: अब एकदम बिल्कुल शांत रहो…
आंचल: फोन लाओ मेरा। मुझे घर जाना है। अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकती हूं। बस तुम्हंे मैने सिर्फ एक चीज कही थी… शादी से पहले। हाथ मत उठाना (सूर्यांश के चांटा मारती है) हाथ मत उठाना। दिल भर गया वाला गाना देखा है मंैने। हाथ मत उठाना। बहुत कष्ट हुआ… मुझे वह वाला गाना देखकर (सूर्यांश को चांटा मारती है)। मुझे पता था मेरा पति ऐसा नहीं होगा…. मगर तुम ऐसे निकले। पता है तुम्हें वह (सास की ओर इशारा)… औरत है। एक ….. औरत है। (सूर्यांश के बाल बल पकड़ कर) मैं कसम खाती हूं। मैं भी इधर उधर….. तुम मरो तो सही पहले। मेरा बेटा मुझे सपोर्ट करेगा। पैसा तेरा और —- मैं — पूरी ऐश काटूंगी। देख — तुम मरो तो सही पहले। तेरी मौत का इंतजार है मुझे। सुहागन की जिंदगी तो अच्छे से जी नहीं पाई। विधवा की ज्यादा अच्छे से जी लूंगी। जो करना होगा करूंगी।
निशा कमरे में घुसते हुए….. मेरे बेटे को मत मारो
आंचल: चल निकल…. यहां से निकल। तुझसे बात कर रही हूं? चल निक निकल यहां से (सूर्यांश से) बोल न इस…… से
सूर्यांश: मम्मी जाओ तुम। (निशा चली जाती है)
आंचल: पहले दिन से जो इनवोल्वमेंट रखा है न इस….. का तुमने मेरे बीच में। बुलाओ किसे बुलाना है। फोन दो मेरा…
सूर्यांश-: मेरे पास नहीं है दूसरे कमरे में है।
आंचल: मुझे सब होश है। तुम उस ….. के साथ…. इस ….. ने तुम्हारे नौकरों को खरीदा हुआ है। यह बात दिल्ली तक पहुंचेगी। ….. फिर क्या होगा तुम्हें अंदाजा नहीं है सूर्यांश। अब चीजें कभी ठीक नहीं हो सकतीं। तुम्हे जितना मारना था मार लिया। अब मारो न….
सूर्यांश: तुम्हे नहीं रहना…. मत रहो तुम्हारे घरवालों को बुलाते हैं।…. अभी शांत रहो।
आंचल: हम चाहते हैं तुम मरो…. उधर जाकर मरो।


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