
कानपुर में गंगा के जलस्तर ने 14 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2011 के बाद गंगा बैराज पर जलस्तर 115 मीटर पहुंच गया है। बैराज पर खतरे के निशान पर गंगा पहुंच गई। दूसरी तरफ गंगा किनारे 16 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। करीब 500 परिवार बैराज से बिठूर जाने वाली सड़क पर पालीथीन से तंबू बनाकर रह रहे हैं।इसके साथ गांव में लोग घर में ताले लगा कर निकल गए हैं। भूखे बच्चों की ये स्थिति है कि कुछ लोग खाना या समोसा बांटने के लिए आते हैं, तो बच्चे उनकी तरफ दौड़ पड़ते हैं।

बाढ़ से लोगों की मदद के लिए राजनीतिक, सामाजिक संगठन और प्रशासन सक्रिय हैं। मंधना गंगा बैराज हाईवे पर जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी ने अपने साथियों के साथ शुक्रवार को बाढ़ पीड़ितों को एक हजार लंच पैकेट वितरण किये। इसके साथ ही समाजसेवी प्रवीण पाण्डेय ने बाढ़ पीड़ितों को फल वितरण किये। लगातार हो रही व्यवस्था से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिल रही है।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से रेड क्रॉस सचिव आर के सफ्फर, संजीव चौहान, शरद त्रिपाठी, संजय अग्रवाल, राकेश मिश्रा, दिलराज पांति, पंकज अवस्थी मौजूद रहे। लोगों ने इस मुश्किल घड़ी में बाढ़ पीड़ितों की मदद की अपील करते हुए कहा कि, बाढ़ के कारण गंगा कटरी के हालात बेहद खराब हैं। लोगों को खाने, दवाइयों, और रहने की बहुत दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे समय में सभी को दिल खोलकर मदद करनी चाहिए, बाढ़ पीड़ितों की मदद करना सबसे बड़ी सेवा है।

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