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Kanpur : डफरिन अस्पताल के Dr सुधीर कुमार द्विवेदी हुए सम्मानित।

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कानपुर: सुहागरात टालता रहा पति, पत्नी ने नपुंसकता छिपाकर शादी का लगाया आरोप; 38 लाख खर्च का दावा

कानपुर की एक नवविवाहिता ने पति पर नपुंसकता की बात छिपाकर शादी करने का आरोप लगाते हुए ससुराल पक्ष...

Kanpur : दूल्हा बने बाबा आनंदेश्वर, महाशिवरात्रि पर उमड़ा आस्था का सैलाब; लाखों श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

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कानपुर में अखिलेश यादव का BJP पर बड़ा हमला, बोले— ‘स्मार्ट सिटी नहीं, बदनामपुर बन गया शहर’

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कानपुर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शुक्रवार को कानपुर पहुंचने से पहले गंगा...

कानपुर में बोले शिवपाल यादव — यूपी में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं

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Kanpur लेंबोर्गिनी कांड : 7 घंटे में आरोपी शिवम मिश्रा रिहा, पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी खारिज..

कानपुर : तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने के आरोपी अरबपति कारोबारी के बेटे शिवम...

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2004 में नकली दवा के साथ आरोपित संचालक राहुल के पिता रामगोपाल पर भी हुई थी कार्रवाई।

कानपुर : बिरहाना रोड के थोक दवा मार्केट के सामने नील वाली गली में नकली दवा बनाने और बेचने का कारोबार कई पीढ़ियों से चल रहा था। यहां से नकली दवाएं यूपी, हरियाणा, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में भेजी जा रही थी। मंगलवार को औषधि विभाग और लुधियाना नारकोटिक्स टास्क टीम ने छापेमारी कर 28.85 लाख की नकदी के साथ बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, दवा बनाने और उसकी पैकेजिंग में प्रयोग होने वाली सामग्री पकड़ी थी। इसके बाद औषधि निरीक्षक रेखा सचान ने स्टोर को सील कर कलक्टरगंज थाने में संचालक राहुल अग्रवाल और उनकी पत्नी पायल पर मुकदमा कराया और संचालक की बेटी वर्तिका अग्रवाल से लुधियाना नारकोटिक्स टास्क टीम ने कई घंटों तक पूछताछ की। इसमें कई साक्ष्य सामने आए हैं। इसके आधार पर टीम उसे अपने साथ लुधियाना ले गई है। इंस्पेक्टर ललित प्रताप सिंह ने बताया कि स्टोर संचालक की बेटी को साथ ले जाने की जानकारी दी गई है।

औषधि निरीक्षक ने बताया कि दुकान से फरार होने वाले संचालक राहुल नकली दवा का काम पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं। जांच में पता चला है कि वर्ष 2004 में राहुल के पिता रामगोपाल अग्रवाल पर नकली दवा के मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वे ट्रांसपोर्ट नगर में नकली दवाओं के साथ पकड़े गए थे। अब शहर में नकली दवा का कारोबार करने वालों के तार खंगाले जा रहे हैं। जहां मानक के विरुद्ध दवाएं बनाकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। एसीपी कलक्टरगंज आशुतोष सिंह ने बताया कि श्री लक्ष्मी फार्मा मेडिकल एंड सर्जिकल स्टोर में मानक के विरुद्ध दवाएं मिलने के मामले में संचालक राहुल और उनकी पत्नी पायल पर औषधियों में मिलावट, मिलावटी दवाओं की बिक्री, धोखाधड़ी आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

जिस दवा की मांग, उसे घर पर ही बनाते थे : नील वाली गली स्थित स्टोर की तीसरी मंजिल पर छापे में एंटीबायोटिक और दर्द में प्रयोग होने वाली दवाओं के साथ संक्रमण के इंजेक्शन बड़ी मात्रा में मिले थे। औषधि अधिकारियों का अनुमान है कि मार्केट में जिस दवा की अधिक मांग रहती है, यह नकली दवा के कारोबारी उसे ही बनाते हैं ताकि बाजार में उनकी बनाते हैं ताकि से खरीदी जा सके। कई शहरों में जाल फैला होने के कारण दवाओंको मनमाने ब्रांड और मूल्यों पर बाजार में बेचे जाने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि नकली दवा के कारोबार में शहर के कई लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। औषधि निरीक्षक रेखा सचान ने बताया कि छापेमारी के दौरान मिली पांच प्रकार की दवाओं की सैंपलिंग की गई थी, जांच रिपोर्ट आने के बाद दवा की गुणवत्ता की हकीकत सामने आएगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि रिपोर्ट से यह जो दवाएं बनाई जा रही थी, वो कितनी नुकसानदायक हो सकती है।।

इसी मामले में रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव आर के सफ्फर ने कहा कि दवाएं बीमारी के वक्त शरीर को स्वस्थ बनाने के साथ गंभीर स्थिति में जीवन रक्षक होती हैं। स्वास्थ्य के लिए वरदान समझी जाने वाली यही दवाएं यदि मुनाफाखोरी का जरिया बन जाएं तो सेहत की दुश्मन बन जाती हैं। कानपुर में नकली दवाओं के एक बड़े गिरोह को पकड़ा। पुलिस ने आरोपितों के पास से अलग-अलग ब्रांड की नकली दवाएं बरामद कीं। जो कि बहुत ही चिंताजनक स्थित है ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

इसी मामले में आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ देवेंद्र लाल चंदानी ने कहा की नकली दवाओं का कारोबार अब संगठित अपराध का स्वरूप ले चुका है जो लगातार मरीजो की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक जल्द ही भारतीय दवा बाजार 60.9 अरब डालर के स्तर को पार कर जाएगा। ऐसे में अपने मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर समय रहते सख्त कार्रवाई करनी होगी। नकली दवाओं को बनाना-बेचना भ्रष्टाचार ही नहीं मानवीय सेहत के लिए एक बड़ा खतरा भी है। एक ही मर्ज की बाजार में मिलने वाली अलग-अलग ब्रांड की दवाओं की दक्षता में अंतर होना चिंताजनक है।

https://youtu.be/hARHoRYgtnM?si=X_znmgE8NHcLYCaY

नकली और मिलावटी दवाएं जहां बीमारी से लड़ने में असरदार नहीं होती हैं, वहीं वे दूसरे रोगों का कारक बनती हैं। इनका सेवन गुर्दे, यकृत, हृदय और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। गुणवत्ताविहीन दवाएं निर्यात के मोर्चे पर देश की साख भी कमजोर करती हैं। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली ये गतिविधियां अब संगठित अपराध की शक्ल ले चुकी हैं। दवा निर्माण एक चरणबद्ध प्रक्रिया है। ये वैज्ञानिक परीक्षण के बाद उपभोक्ताओं तक पहुंचती हैं। दवा कंपनियों में प्रयोगशालाएं होती हैं, जहां प्रत्येक चरण का आकलन कर दवा को अंतिम रूप दिया जाता है। दवा निर्माता कंपनी के लिए तय प्रोटोकाल का पालन अनिवार्य है।


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